Tuesday, March 30, 2010

मेरा जीवन इक डोर

मेरा जीवन इक डोर
बड़ा कमजोर-
न कोई ओर है न कोई छोर
बस इक सूत बिन टाका बिन जोड़
मेरा जीवन इक डोर |

इस डोर पर वार ताबड़तोड़
खंडित हो टुकडो में कोटि-
कष्ट झेले घनघोर |
पर इक आस्था सूत की महिमा बेजोड़
जो बार-बार , कोटि बार , हर बार-
हर टूटे सूत को जोड़े-
जिसका फिर ना कोई तोड़
मेरा जीवन इक डोर |

नाकामयाबी का चादर ओढ़
ये डोर ना भगा कभी मैदान छोड़
इक आस्था सूत की ही महिमा बेजोड़
शत्रु जो करते थे वार ताबड़तोड़'
आज हैं चरणधूल बने-
बाकि भागे उल्टे पांव घर की ओर |
मेरा जीवन इक ऐसा डोर
राम-नाम से होता इसका ओर
राम-नाम पे ही जा रुकता इसका छोर |
मेरा जीवन इक ऐसा डोर
मेरा जीवन इक डोर ||

1 comment:

  1. bahut achha hai, dear, may u live long, All The Best. . .

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