Monday, June 21, 2010

(1)
न रही मेरी जिंदगी में अब तो तू बस एक एहसास है
न रही पाने की ख्वाइस अब तो तेरा कही होना ही खास है ||

(2)

हम से ना पूछो गम क्या है, हमने तो ग़मों के पोखर में रहकर ही खुशियों के सागर को तलाशा है ||

(3)

ना जाने उन्होंने ये कैसा खेल खेला-
कुँए से निकाल हमें खाई में धकेला ||

(4)

हाँ, आपको चाह कर मुस्काना छोड़ दिया,
आपको याद कर आंसू बहाना छोड़ दिया,
चाहते हुए भी न आशिक बन पाए
और न चाह कर भी हमने जमाना छोड़ दिया. . .

No comments:

Post a Comment