Saturday, June 26, 2010

सब कुछ एक वादे के लिए....

लगाम को रखा है थाम
और गम की पी ली है जाम
सब कुछ एक वादे के लिए....
मौत को दिया है जिंदगी का नाम
और सर ले ली है हर इलज़ाम
सब कुछ एक वादे के लिए...
अपनी जिंदगी बना बैठा गुजरे पलों का कब्रिस्तान
और खुद मुह्हबत के हाथों बेंच आया हूँ ईमान
सब कुछ एक वादे के लिए...
उनकी यादों के बिना रहा ये दिल सुनसान
और हमारे लब्ज़ हमसे ही हो गए गुमनाम
सब कुछ एक वादे के लिए...
ना रहा एक तिनके का सहारा मैं आशिक बदनाम
और लोग कहते हैं ये लो आ गए पी के भाईजान
सब कुछ एक वादे के लिए....
भींगी थी पलकें और हथेली पे थी जान
और तभी हमने दे दी उन्हें जुबान
सब कुछ एक वादे के लिए...
जिंदगी खफ़ा है और ना है मौत मेहरबान
नाजुक है पल और दर्द ले रहा इंतहान
सब कुछ एक वादे के लिए....

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