Sunday, August 1, 2010

सुहाने मौसम की वो सुहानी शाम

Happy Friendship Day, The SASAA (Saurav Amresh Sukesh Akshay UK Akshay Sug)Group Love u ALL... U'v really been wid me always during my tough times. This Poem is on d Get Together of we 3 friends, Amresh, Saurav, Sukesh...we shared some special moments & something happened vry special. . . sukku, baba read ths !!

सुहाने मौसम की वो सुहानी शाम
गरजते बादलों से वो घिरा आसमान
यारों की यारी और वो बिजुल सुनसान
याद आये वो पल, वो पल मेहरबान
सुहाने मौसम की वो सुहानी शाम ||

दोस्तों की मस्ती वो मस्ती का जाम
मिलन का जस्न वो बाइक की सवारी
सुकेश की जिद सौरव की होशियारी
याद आये वो पल, वो कल मेरी जान
सुहाने मौसम की वो सुहानी शाम ||

वो भीगी जमीं भिगाता असमान
काँपता बदन वो चाय की चुस्की
बहता बिजुल और वो खाली बोतल की कस्ती
याद आये वो बिजनेस, वो बिजनेस प्लान
...सुहाने मौसम की वो सुहानी शाम ||

वो बाइक चलाने की होड़ वो सुक्कू की जीत
प्रेम गली का मोड़ वो हॉउस न0 की शीट
वो धड़कता दिल उनके दीदार की आश
याद आये वो पल, वो कल मेरी जान
सुहाने मौसम की वो सुहानी शाम ||

उनका अचानक दिखना अचानक पलों का थमना
अर्शे बाद नज़रों का मिलना वो हुस्न आशिकाना
वो दिल में जमी बर्फ आँखों से पिघलना
याद आये वो जान, वो जान मेरी जान
सुहाने मौसम की वो सुहानी शाम ||

वो पल भर में दिखना पल में खो जाना
उनके दीदार का जस्न वो मुड़कर उन्हें देखना
गूंथे लम्बे बाल, वो बाल में बीता कल नज़र आना
याद आये वो भीगी, वो भीगी शाम मेरी जान
सुहाने मौसम की वो सुहानी शाम ||

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