Saturday, December 25, 2010

(1)
बिलकुल आपकी तरह ही हम भी बदल नहीं सकते
आप हमें और हम आपको समझ नहीं सकते
फर्क बस इतना है -
आपने हमें ठुकरा के कहा "न दोस्ती न प्यार, बस करेंगे आपसे बातें ही "
औ' हमने आपको अपना के कहा "अब जा, जी ले अपनी जिंदगी " ||......... 'ॐ साईं
 
(2)
मरहम दर्द बनी है और दर्द दवा हो रहे हैं
जाने क्यों मेरे टूटे अरमाँ फिर से जवाँ हो रहे हैं. . .
(3)
जीना है एक बार और ज़िन्दगी भी एक बार. . . तो क्यूँ ना सुनूँ अपने दिल की पुकार . . .
(4)
आजकल हर पल ज़िन्दगी इन्तहां है
कभी दांव पे इज्ज़त कभी लगी जाँ है. . .
(5)
न जाने कब ये कैसे कहाँ हो गया
हमने न चाहा फिर भी आँखों से बयाँ हो गया
रह सकते तो ज़िन्दगी भर चुप ही रहते
पर न जाने कब ये आँखें हो गयी गुस्ताख और दिल जवाँ हो गया . . . 
(6)
ना जाने ज़िन्दगी ये कैसी इन्तहां ले रही है
जब जीना सीखा तभी मौत बुला रही है. . .

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