Sunday, October 6, 2013

Sagacious Persona - written in the honor of Mr. R Gowthaman (CEO Mindshare, South Asia)

Man of oceanic desire, the Czar of Ad Empire
Smile – the identity, eyes showers the fidelity.
A tranquil reservoir of unmoving sea –
G-man! You are the assiduous icon of beauteous bee.

When world’s drowning in glare falsity
here’s a man floating in fragrance of spirituality.
Like the luminous star – so high – so ideal
they say your vision is so celestial.
Immersed in virtue, voice so glee,
A tranquil reservoir of unmoving sea – G-man! You are the assiduous icon of beauteous bee.

Innate eloquence, so brainy – so stout,
awesome is the river of your thoughts flowing about !! through the stream of divinity against all phantasm, unveiling truths of life in “Tripura Rahashyam”.
It’s the G-man’s way to serve Humanism!!
Hard believer of ‘Family First’, Smart deliverer each Duty.
A tranquil reservoir of unmoving sea –
G-man! You are the assiduous icon of beauteous bee.

Carving an eternal mark in hearts of all your knowns,
G-man you hail a sincere soul in all your professional & personal zones.
I pray, May almighty ever have his eyes on your well-being,
Mindshare Man, may we see you ever & forever Winning.
Inspiration to many, an ideal - so worthy,
A tranquil reservoir of unmoving sea –
G-man! You are the assiduous icon of beauteous bee.

- Amresh PY           

Thursday, April 18, 2013

Happy Marriage Anniversary – (Sachin Sir)

(written for my boss on the occasion of his Marriage Anniversary)
सफ़र है सुहाना, है सुहानी ये मंजिल
अनोखी इनकी दुनियां, अनोखा है दिल.
खुशियों में रमें, बीते खुशियों में जीवन
न जाने कब सचिन का "स"हुआ -
शिखा के "श" में गुम.
रहे मुश्कान से रोशन सदा - है दुआ
मुबारक हो आपको सादी की पहली सालगिरह

थम सा गया था वो वक़्त -
हांथो में थी वरमाला, आखों में चमक औ' चेहरे पे मुश्कान
फिर शर्मीली नज़रों से हो गए एक दूजे के मन
यादों की डोली में हो सवार मस्ती की दुल्हन
युहीं चला चले ये जीवन. युहीं चला चले ये जीवन.

मार्मिक गत वर्ष में देखा चंद्रमुखी का रूप
लो, अब दिखेंगी आपको सूरजमुखी...
वक़्त गुजरेगा और फिर -
होगा avatar of permanent ज्वालामुखी... !!
रहे ये दामन सजा, खुशियों से सदा
मुबारक हो आपको सादी की पहली सालगिरह..
हसमुख है ये जोड़ी, ये जोड़ी है Superkool.
सच्चाई है, प्यार है- है बचपना - Sweet Couple
रखना दूर नज़रों से बुरी ऐ भगवान्
रहे सुरक्षित नज़रो में सुसज्जित ऐ भगवान्
रहे दुनियां रोशन सदा - है दुआ
मुबारक हो आपको सादी की पहली सालगिरह. . .

Thursday, January 31, 2013

Safety Dudes

Swinging in hammock of precaution, we sing every song of safety
Availing the equips, destroying delusions, we hymn every mantra of safety
For we do the modern man, know the real core –
Energized are we, so mature.
To sing every song, always we seek true lyrics of safety.
Younger the blood we, the L&tite, are the modern safety dudes


Insights so clear, not enforceable, it’s not a Rule
Step by step, we have made this behavior so Cool..


Our Aim’s too high, yet we don’t take a careless fly
Upper the upper we go, always with responsible echo
Resistible some conditions, yet we ensure safety ever.
 
Caring in attitude, so responsible are we
Our Aim’s high in terms of development & in money
Resolutions we make to advance with no compromises to safety
Evolving the natural etiquettes of precaution, we remain always in glee.
 
V  A  L  U  E

Tuesday, January 1, 2013

Damini - "मां मैं जीना चाहती हूँ"

मां मैं जीना चाहती हूँ
अपनी आँखों से दुनिया की सुन्दरता को -
फिर देखना चाहती हूँ.
मां मैं जीना चाहती हूँ
मैं नहीं कहती की उन्हें फांसी दे दो
मैं ये भी नहीं कहती की उनसे जीने हक छीन लो
माँ, मैं बस एक सवाल पूछना चाहती हूँ...
किसने दिया था उन्हें ये हक, जो वो मुझपे जानवरों सा टूट पड़े
मैं तो उनकी बहनों में ही एक थी
जो मेरी ही जैसी माँ की कोख से जन्मे थे
और जिनकी मेरी ही जैसी बेटी होती...
माँ मैं मेरी खता क्या थी.
क्या मेरे कपड़ो से मेरी नीयत को आंकना मुनासिब था
अगर था, तो क्या उस ३ साल की नन्ही ने भी छोटे कपडे पहने थे..
अगर नहीं, तो जवाब दो
माँ मुझे जवाब चाहिए
माँ मैं कब जी पाऊँगी
जब थी ३ की तो भी थी बुरी नज़र
२३ की हुई तो भी कहाँ बक्शा
माँ जब मैं तेरी उम्र की हो जाउंगी,
क्या तब मैं अपने ही देश में लोगो की अपनी हो पाऊँगी
माँ मैं जवाब चाहती हूँ
किसपे करूँ भरोसा-
यहाँ सभी लगते इंसान, पर ना जाने कितने हैं जानवर यहाँ
माँ मैं जीना चाहती हूँ
माँ मैं जीना चाहती हूँ

कहें क्या - Damini/Nirbhaya/Amanat

कहें क्या आज जो गला गम से अवरुद्ध है
सीने में लिए हैं आग, आत्मा क्षुब्ध है
बोलो थी क्या खता, वो तो नादान थी
आदमी के अन्दर छुपे जानवर से अनजान थी
जो हुआ वो देश की संस्कृति को तमाचा था
क्या बापू गाँधी ने ऐसा ही देश आँका था
बेटियाँ देश की, हैं क्षुरक्षित अब तो बस गर्भ में
बाहर हैं बस भूखे भेड़िये, शर्मसार हैं प्रकृति इस सन्दर्भ में
है वही देश जहाँ हम नारियों को पूजते थे
और उसी देश में आज हम नारियों को दबोचते हैं
है नहीं ये मौत तुम्हारी, ये इंसानियत का कतल है
क्षुब्ध है गला, सीने में दर्द और आज मन विकल है.
आओ ले आज एक प्रण -
देखेंगे हर नारी को सम्मान की नज़रों से
हम बदलेंगे समाज बदलेगा -
आओ मिल के बचाए अपनी माँ-बहनों को इन समाज के दरिंदो से ।।