Tuesday, January 1, 2013

Damini - "मां मैं जीना चाहती हूँ"

मां मैं जीना चाहती हूँ
अपनी आँखों से दुनिया की सुन्दरता को -
फिर देखना चाहती हूँ.
मां मैं जीना चाहती हूँ
मैं नहीं कहती की उन्हें फांसी दे दो
मैं ये भी नहीं कहती की उनसे जीने हक छीन लो
माँ, मैं बस एक सवाल पूछना चाहती हूँ...
किसने दिया था उन्हें ये हक, जो वो मुझपे जानवरों सा टूट पड़े
मैं तो उनकी बहनों में ही एक थी
जो मेरी ही जैसी माँ की कोख से जन्मे थे
और जिनकी मेरी ही जैसी बेटी होती...
माँ मैं मेरी खता क्या थी.
क्या मेरे कपड़ो से मेरी नीयत को आंकना मुनासिब था
अगर था, तो क्या उस ३ साल की नन्ही ने भी छोटे कपडे पहने थे..
अगर नहीं, तो जवाब दो
माँ मुझे जवाब चाहिए
माँ मैं कब जी पाऊँगी
जब थी ३ की तो भी थी बुरी नज़र
२३ की हुई तो भी कहाँ बक्शा
माँ जब मैं तेरी उम्र की हो जाउंगी,
क्या तब मैं अपने ही देश में लोगो की अपनी हो पाऊँगी
माँ मैं जवाब चाहती हूँ
किसपे करूँ भरोसा-
यहाँ सभी लगते इंसान, पर ना जाने कितने हैं जानवर यहाँ
माँ मैं जीना चाहती हूँ
माँ मैं जीना चाहती हूँ

No comments:

Post a Comment